
आध्यात्मिक परंपराओं में चंद्र ग्रहण को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि ग्रहण काल में किया गया मंत्र जप कई गुना अधिक प्रभावशाली हो जाता है।
विशेष रूप से शाबर मंत्र, जो सामान्य व्यक्ति भी बिना कठिन साधना के जप सकता है, ग्रहण काल में चैतन्य होकर शीघ्र फल देने लगता है।
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3 मार्च 2026 का चंद्र ग्रहण
आगामी 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण पड़ रहा है। यह ग्रहण भारत सहित एशिया के कई देशों में दृश्यमान होगा.
इस ग्रहण का समय शाम 6 बजकर 26 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 46 मिनट तक रहेगा, जिसकी कुल अवधि 20 मिनट की होगी.
ग्रहण काल में शाबर मंत्र जप की मान्यता
शास्त्रों और लोक परंपराओं में यह विश्वास है कि—
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ग्रहण काल में बिना गिनती मंत्र जप करने से मंत्र सिद्ध हो जाता है
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विशेष दीक्षा या कठिन साधना की आवश्यकता नहीं होती
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सामान्य व्यक्ति भी ईश्वर की कृपा प्राप्त कर सकता है
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मानसिक, पारिवारिक, आर्थिक और स्वास्थ्य समस्याओं में राहत मिलती है
किसके लिए है यह मंत्र साधना?
यह साधना विशेष रूप से उन लोगों के लिए है—
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जो जीवन की समस्याओं से मुक्ति चाहते हैं
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जिन्हें किसी विशेष मंत्र सिद्धि का ज्ञान नहीं है
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जो केवल ईश्वर की कृपा चाहते हैं
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जो सरल उपाय से मनोकामना पूर्ति करना चाहते हैं
ग्रहण काल में मंत्र जप की विधि (सरल प्रक्रिया)
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अपने क्षेत्र के अनुसार ग्रहण समय जान लें
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ग्रहण से 5–10 मिनट पहले आसन पर बैठ जाएं
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ग्रहण काल में कोई पूजा नहीं होती, इसलिए:
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केवल सरसों के तेल का दीपक जलाएं
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दीपक एक बत्ती वाला या चौमुखा, कोई बाध्यता नहीं
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मन ही मन भगवान शिव का स्मरण करें
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उनसे कृपा की प्रार्थना करें
शिव शाबर मंत्र (ग्रहण काल के लिए)
ग्रहण शुरू होते ही, बिना माला और बिना संख्या के लगातार जप करें—
“शंकर शंकर काशी के वासी अरज हमारी दरश दिखाओ गौरा संग आओ दोनो सुत संग लाओ दलिद्र काटो रोग काटो शत्रु नाशो भण्डार भरो न करो तो तोको राजा राम की दुहाई”
👉 जप ग्रहण समाप्ति (मोक्ष) तक करते रहें।
ग्रहण के बाद क्या करें?
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ग्रहण समाप्त होने पर:
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भगवान शिव को धन्यवाद दें
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उन्हें बार-बार प्रणाम करें
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इसके बाद:
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इस मंत्र का प्रतिदिन 5, 11 या 21 बार जप करें
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साधारण शिव पूजन करते रहें
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मंत्र जप से मिलने वाले लाभ
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जीवन की नकारात्मकता समाप्त होती है
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दरिद्रता, रोग और शत्रु बाधा में कमी
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मन में शांति और आत्मविश्वास बढ़ता है
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ईश्वर की कृपा से कार्यों में सफलता
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विशेष संकल्प लेने पर त्वरित परिणाम
निष्कर्ष
चंद्र ग्रहण केवल खगोलीय घटना नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का अवसर है। यदि आप सरल विधि से, बिना किसी डर या जटिलता के, भगवान शिव की कृपा पाना चाहते हैं तो यह शिव शाबर मंत्र जप आपके लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकता है।
इस अवसर का लाभ लें, मंत्र जप करें और जीवन को समस्याओं से मुक्त बनाएं।
❓ Frequently Asked Questions (FAQ)
❓ चंद्र ग्रहण में मंत्र जप क्यों किया जाता है?
चंद्र ग्रहण काल को आध्यात्मिक रूप से अत्यंत शक्तिशाली समय माना जाता है। इस दौरान किया गया मंत्र जप सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक प्रभावशाली होता है और मंत्र जल्दी फल देने लगता है।
❓ क्या चंद्र ग्रहण में शाबर मंत्र का जप कोई भी कर सकता है?
हाँ, शाबर मंत्र की विशेषता यही है कि इसे सामान्य व्यक्ति भी बिना दीक्षा और कठिन साधना के जप सकता है। इसमें विशेष शिक्षा या तंत्र ज्ञान की आवश्यकता नहीं होती।
❓ क्या ग्रहण काल में पूजा करना आवश्यक है?
नहीं, ग्रहण काल में पूजा नहीं की जाती, केवल मंत्र जप किया जाता है। एक सरसों के तेल का दीपक जलाकर भगवान शिव का स्मरण करना पर्याप्त माना गया है।
❓ क्या मंत्र जप की कोई निश्चित संख्या होती है?
ग्रहण काल में मंत्र जप बिना संख्या, बिना माला किया जाता है। ग्रहण प्रारंभ से लेकर मोक्ष तक लगातार जप करना ही सर्वोत्तम माना गया है।
❓ ग्रहण के बाद मंत्र जप कैसे जारी रखें?
ग्रहण के बाद इस मंत्र का प्रतिदिन 5, 11 या 21 बार जप किया जा सकता है। नियमित जप से जीवन में शांति, स्थिरता और सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलते हैं।
❓ इस शिव शाबर मंत्र से क्या लाभ होते हैं?
इस मंत्र के जप से:
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मानसिक शांति मिलती है
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रोग और दरिद्रता में कमी आती है
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शत्रु बाधा से राहत मिलती है
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ईश्वर की कृपा से कार्यों में सफलता मिलती है
❓ क्या मनोकामना पूर्ति के लिए संकल्प लिया जा सकता है?
हाँ, किसी विशेष कार्य या इच्छा की पूर्ति के लिए संकल्प लेकर मंत्र जप किया जा सकता है। इससे शीघ्र और सकारात्मक परिणाम मिलने की मान्यता है।
❓ क्या यह मंत्र पहले से सिद्ध है?
यह शिव शाबर मंत्र पहले से ही प्रभावशाली माना गया है। ग्रहण काल में जप करने से इसकी चैतन्यता और फल देने की क्षमता और बढ़ जाती है।
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